डिजिटल इंडिया के दौर में राजगढ़ में ‘झगड़ा प्रथा’ का खेल, नाबालिग लड़की पर थाने के सामने 20 लाख की पंचायत

 राजगढ़

डिजिटल इंडिया के इस दौर में अगर आपको लगता है कि बाल विवाह और 'झगड़ा प्रथा' जैसी कुप्रथाएं सिर्फ इतिहास के पन्नों या दूर-दराज के जंगलों तक सीमित रह गई हैं, तो राजगढ़ जिले के खिलचीपुर से आई यह तस्वीर आपकी आंखें खोल देगी।

यहाँ कानून के रखवालों की नाक के ठीक नीचे, थाने के सामने स्थित गायत्री मंदिर परिसर में घंटों तक एक ऐसी पंचायत चली, जिसका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ एक 16 साल की नाबालिग लड़की का सौदा करने और 'झगड़ा' की रकम तय करने पर था।

सबसे शर्मनाक बात यह कि थाने के 'जिम्मेदारों' को इसकी भनक तक नहीं लगी (या उन्होंने देखना जरूरी नहीं समझा)।
फ्लैशबैक: 6 साल की उम्र में तय हो गया था 'भविष्य'

मामले की जड़ें 10 साल पुरानी हैं। खिलचीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रघुनाथपुरा की रहने वाली इस मासूम की शादी महज 6 साल की उम्र में छीपीपुरा गांव के एक लड़के से कर दी गई थी। बचपन का वो बाल विवाह आज इस लड़की के लिए जी का जंजाल बन चुका है।

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एक 'फोटो' और शुरू हो गया 20 लाख का बवंडर

कुछ दिन पहले लड़की के मायके में एक शादी समारोह था, जहाँ उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ एक सामान्य फोटो खिंचवाई। यह फोटो किसी तरह लड़की के ससुराल पक्ष तक पहुंच गई और इसे 'नाक का सवाल' बना लिया गया।

ससुराल पक्ष की जिद: "लड़की को तुरंत हमारे घर (ससुराल) भेजो।"

मायके पक्ष की दलील: "लड़की अभी 16 साल की नाबालिग है, 18 साल पूरे होने से पहले विदाई नहीं करेंगे।"

बस, इसी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष शिकायत करने थाने पहुंचे। लेकिन थाने के भीतर जाने के बजाय, थाने के ठीक सामने ही पंचों ने अपनी 'अदालत' (पंचायत) लगा दी।
नाबालिग के अधिकारों पर 'झगड़ा प्रथा' भारी

घंटों चली इस पंचायत में न तो किसी को इस बात की चिंता थी कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, और न ही किसी को उस 16 साल की बच्ची के भविष्य और अधिकारों की परवाह थी। पूरा फोकस इस बात पर था कि 'झगड़ा' (सहमति या अलगाव के बदले दी जाने वाली सामाजिक रकम) कैसे तय हो।

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लड़की के भाई ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष के लोग उसकी बहन को जबरन ले जाने पर अड़े हैं और ऐसा न करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे हैं।

अंजाम: पंचायत बेनतीजा, अब आगजनी की धमकी!

जब घंटों की सिरपच्ची के बाद भी बात नहीं बनी और पंचायत बेनतीजा समाप्त हो गई, तो लड़के पक्ष के लोग कथित तौर पर कानून हाथ में लेने और आगजनी करने की धमकी देते हुए वहां से चले गए।

बड़ा सवाल: थाने के ठीक सामने समाज को दीमक की तरह चाट रही कुप्रथाओं का यह तमाशा होता रहा, धमकी भरे अल्टीमेटम दिए गए, लेकिन पुलिसिया सिस्टम मूकदर्शक बना रहा।

अब देखना यह है कि क्या राजगढ़ प्रशासन इस होनहार नाबालिग को इंसाफ दिला पाता है या कुप्रथाओं के आगे कानून ऐसे ही नतमस्तक रहेगा?