इंदौर में दूषित पानी की त्रासदी: 30 लोगों की मौत, डॉक्टर की पत्नी और पहलवान भी शिकार

इंदौर
देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह लक्ष्मी रजक नामक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

इससे पहले मंगलवार को उल्टी-दस्त से पीड़ित 75 वर्षीय खूबचंद (पिता गन्नुदास) की भी उपचार के दौरान मौत हो गई थी।बुधवार को उनके स्वजन और स्थानीय लोगों ने आक्रोश जताते हुए सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। समझाइश के बाद वे लोग अंत्येष्ठि के लिए माने और शव लेकर श्मशान घाट के लिए रवना हुए।

लक्ष्मी रजक जैन (निवासी)दूध वाली गली) दूषित पानी से फैले संक्रमण की शिकार हुईं। विडंबना यह रही कि उनके पति स्वर्गीय डॉ. के.डी. रजक ने जीवनभर मरीजों का इलाज किया, लेकिन उनके ही परिवार को यह त्रासदी झेलनी पड़ी। परिजनों के अनुसार रविवार को लक्ष्मी रजक को अचानक घबराहट और पेट में तेज दर्द हुआ। हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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सीएचएल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश गुप्ता ने बताया कि जांच में लक्ष्मी रजक की किडनी में गंभीर संक्रमण पाया गया था। संक्रमण तेजी से फैल चुका था और अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि उनके पति का निधन भी महज 17 माह पहले हुआ था, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

इसी दिन भागीरथपुरा निवासी 62 वर्षीय पूर्व पहलवान खूबचंद बंधोनिया की भी उल्टी-दस्त से बिगड़ी हालत के बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीवरेज मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिसकी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अखाड़े में बड़े-बड़े पहलवानों को पटखनी देने वाले खूबचंद दूषित पानी के संक्रमण से जंग हार गए।

दो मरीज वेंटिलेटर पर

दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस बीमारी का कहर भले ही अब काफी हद तक कम चुका है, लेकिन क्षेत्र के लोग अब भी परेशान है। भागीरथपुरा क्षेत्र में अब तक 4,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से लगभग 450 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फिलहाल 10 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

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घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में पानी की नियमित जांच के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में अभी भी दहशत का माहौल बना हुआ है।