विश्व कप 100 साल के इतिहास में सबसे महंगा टूर्नामेंट, अमीर तबके के प्रभुत्व पर बहस तेज

नई दिल्ली
 फीफा विश्व कप के 100 साल के इतिहास में टिकटों के लिहाज से अब तक के सबसे महंगे विश्व कप को अगर सिर्फ अमीरों का टूर्नामेंट कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी।

बड़ी मुश्किल से इस विश्व कप की टिकट खरीदकर मैदान पहुंच रहे कुछ आम प्रशंसकों को इसका अहसास भी हो रहा है। स्टेडियमों की सीटों पर उन्हें अधिकतर लोग ऊंचे तबके के नजर आ रहे हैं, जिनमें से अधिकतर को वह पहले ही सुर्खियों या टीवी पर देख चुके हैं।

दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध इस विश्व कप के पहले मुकाबले को देखने पहुंचे मेक्सिको के फुटबॉल प्रशंसक मार्सेलो गोंजालेस की मानें तो उन्होंने मेक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम के एंट्री गेट की ओर जाते हुए हरे रंग की शर्ट पहने लोगों की जो भीड़ देखी तो वह खुद से सवाल करने लगे कि क्या यह भीड़ असली मेक्सिको का नेतृत्व करती है, क्योंकि उन लोगों में अधिकतर ने राष्ट्रीय टीम की बिल्कुल नई जर्सी पहनी हुई थी।

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गोंजालेस ने महसूस किया कि वहां मौजूद ज्यादातर लोग मेक्सिको के अमीर और ऊंचे तबके से थे। जिनमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि मैं उनमें से लगभग 10 लोगों को तो पहले ही देख चुका था।

गोंजालेस और उनके एक दोस्त को सिर्फ तीन दिन पहले ही टिकट मिले थे और प्रत्येक टिकट के लिए लगभग 3.32 लाख रुपये (3,500 अमेरिकी डालर) खर्च करने के बाद भी इन हालातों में गोंजालेस को लग रहा है कि गनीमत है कि उन्हें टिकट सस्ती मिल गईं।

खस्ता हाल मेक्सिको के स्टेडियम में महंगी बीयर
मैच देखने पहुंचे एक और आम प्रशंसक 40 वर्षीय अल्फोंसो एसेवेज ने बताया कि एक और मेक्सिको में शिक्षक संघ वेतन और पेंशन के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान परेशान हैं। दूसरी और स्टेडियम में अमीर लोग करीब 2000 रुपये की बीयर का मजा ले रहे हैं। अल्फोंसो के अनुसार असल में इन लोगों में से कई मैक्सिकन मूल के अमेरिकी हैं, जो टूर्नामेंट के मैक्सिकन चरण में अपने समर्थन के साथ-साथ अपनी खर्च करने की क्षमता का दिखावा करने आए हैं।

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मेक्सिको की राष्ट्रपति नहीं आईं स्टेडियम
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने महीनों पहले फैसला किया था कि वह उद्घाटन मैच में शामिल नहीं होंगी। शिनबाम को इस मुकाबले के लिए फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बगल वाली सीट टिकट मिली थी, लेकिन शिनबाम ने अपने देश की आदिवासी एथलीट वेराक्रूज को यह टिकट दे दी थी। शिनबाम ने शहर में प्रशंसको के साथ स्क्रीन पर मैच देखा और शायद इस तरह उन्होंने फीफा की आम लोगों की पहुंच से दूर महंगी टिकटों का मूक विरोध किया।

अमेरिका में हो रही कानूनी कार्रवाई
फीफा ने मुकाबलों के लिए टिकटों की कीमतों को सही ठहराते हुए कहा है कि उसे वैश्विक फुटबॉल के लिए अपनी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस कमाई की जरूरत है। हालांकि इन कीमतों की वजह से न सिर्फ प्रशंसक नाराज हुए हैं, बल्कि अमेरिका में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।

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