रामपुर तिराहा कांड: जानें उस गवाह की कहानी जिसने तीन बार लिया केस लड़ने के लिए लोन, अनुभव किया जलियावाला बाग जैसी बर्बरता

चंपावत
आज रामपुर तिराहा गोलीकांड की 31वीं बरसी है। 1994 में आज ही के दिन उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर यूपी पुलिस ने बर्बरता दिखाई थी। 31 साल पहले आंदोलनकारियों पर ऐसा कहर बरपा था, जिसने जलियावाला बाग हत्याकांड की याद ताजा कर दी थी। चंपावत के नवीन भट्ट अपने दम आज भी रामपुर तिराहा कांड की लड़ाई लड़ रहे हैं। सीबीआई ने उन्हें इस हत्याकांड का मुख्य गवाह बनाया है।

रामपुर तिराहा कांड पर सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। स्थिति यह है कि वह गवाही देने निजी खर्च पर मुजफ्फरनगर जाते हैं। नवीन लंबे समय से मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। खेतीखान के कानाकोट निवासी नवीन भट्ट 30 साल से अपने खर्चें से मुजफ्फरनगर की अदालत में गवाही देने जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें सरकार से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती है। नवीन रामपुर तिराहा कांड के चश्मदीद गवाह रहे हैं।

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मुख्यमंत्री धामी ने आंदोलनकारियों को किया याद
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहा कांड के आंदोलनकारियों को याद किया। उन्होंने X हैंडल पर लिखा, "रामपुर तिराहा गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर राज्य आंदोलनकारियों को कोटि-कोटि नमन। आपके अदम्य साहस, बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य का गठन संभव हुआ। हमारी सरकार अमर शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।"

महिलाओं से दुष्कर्म में दो जवान दोषी
मार्च 2024 में मुजफ्फरनगर की अदालत ने 1994 की एक और दो अक्टूबर की रात हुए इस बर्बर कांड में पीएसी के दो जवानों को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। नवीन ने बताया कि मामले में कुल 12 गवाह थे। जिनमें से पांच की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। नवीन वर्तमान में मजदूरी कर रहे हैं। नवीन के तीन बेटे हैं। उनके दो बेटे स्नातक करने के बाद बेरोजगार हैं जबकि सबसे छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है।

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केस लड़ने के लिए तीन बार लोन लिया
नवीन ने बताया कि वह 30 साल से लगातार अपनी जेब से पैसा खर्च कर हर तारीख पर मुजफ्फरनगर की अदालत में उपस्थित होते हैं। बताया कि एक तारीख में जाने में उनकी अच्छी खासी रकम खर्च हो जाती है। नवीन ने बताया कि इसके लिए उन्होंने खेतीखान के एक बैंक से 60-60 हजार रुपये का तीन बार लोन भी लिया। सरकार की अनदेखी से नवीन बेहद आहत हैं। उन्हें अभी तक राज्य आंदोलनकारी भी घोषित नहीं किया गया है।

घटनास्थल से मिले थे महिलाओं के कपड़े
नवीन ने बताया कि आंदोलनकारी महिलाओं को गन्ने के खेत और पास के निर्माणाधीन मकानों में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। दो अक्तूबर की सुबह, रामपुर तिराहे से लगभग 200 मीटर दूर हुई फायरिंग में सात लोग मारे गए। इस घटना ने राज्य आंदोलन को और अधिक हिंसक और संवेदनशील बना दिया।

पुलिस का लाठीचार्ज और गोलीबारी
नवीन भट्ट को एक और दो अक्तूबर 1994 की रात आज भी याद है। नवीन बताते हैं कि वे मुजफ्फरनगर में एक होटल में काम करते थे। उन्होंने काम-धंधा छोड़कर राज्य आंदोलन में कूदने का फैसला किया। एक अक्तूबर को वे दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर पहुंचे। यूपी पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने के रामपुर तिराहे पर बेरिकेडिंग की थी। रात करीब आठ बजे पुलिस ने दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। पूरी रात पुलिस की बर्बरता जारी रही।

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