आरबीआई सुधारों से 75 अरब डॉलर तक विदेशी निवेश की उम्मीद, रुपये को मिल सकती मजबूती

नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया नीतिगत घोषणाओं और निवेश संबंधी सुधारों से भारत में 75 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आ सकती है। एसबीआई रिसर्च और कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन सुधारों से विदेशी निवेश बढ़ेगा, रुपये को मजबूती मिलेगी और सरकारी उधारी की लागत कम हो सकती है।

एसबीआई का अनुमान है कि आरबीआई के उपायों से कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है, जबकि कोटक सिक्योरिटीज ने 50 से 75 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह की संभावना जताई है। दोनों संस्थानों का मानना है कि अगस्त में मौद्रिक नीति समिति रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रख सकती है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.9 प्रतिशत था। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए कमजोर वैश्विक मांग, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को जिम्मेदार बताया है। वहीं खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।

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पीएम ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ किया विमर्श
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक उथल पुथल के बीच आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्यों के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि को और गति देने के उपायों पर विचार विमर्श किया और सुझाव लिए।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए विभिन्न सुझावों और नीतिगत कदमों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही जीवन की सुगमता और कारोबार की सुगमता को बेहतर बनाने से जुड़े सुधारों पर भी मंथन हुआ।

इस समय वैश्विक पटल पर पश्चिम एशिया का संघर्ष एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बैठक के दौरान इस भू-राजनीतिक संकट को लेकर भी गंभीरता से चर्चा हुई। पीएम-ईएसी के सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अपना आकलन प्रधानमंत्री के सामने पेश किया। यह आकलन सरकार को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियां तैयार करने में मदद करेगा।

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यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और असमान विकास दर जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। बैठक में पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास भी मौजूद रहे। वर्तमान में ईएसी-पीएम के अध्यक्ष एस महेंद्र देव हैं। परिषद में तीन पूर्णकालिक सदस्य और 11 अंशकालिक सदस्य शामिल हैं।

सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान है, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए यह 7.7% रह सकती है। आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था की वृद्धि के प्रमुख चालक बने हुए हैं।

वैश्विक संकट में विकास की रणनीति
पीएम व आर्थिक सलाहकार परिषद के बीच हुई इस बैठक में मुख्य रूप से उन रणनीतियों पर मंथन किया गया, जो भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल नीतियां बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार करना भी जरूरी है।

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