रामायण फिल्म में दिखेगा शूर्पणखा के पति विद्युत्जिह्व का किरदार, जानें रावण से क्यों थी दुश्मनी

 30 जुलाई को रामायण का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. यह फिल्म दिवाली के आसपास थिएटर में लगेगी. ट्रेलर रिलीज होते ही इस फिल्म ने सुर्खियां बटोरना शुरू कर दिया. वहीं, इस रामायण फिल्म में विवेक ओबेरॉय विद्युत जीवा (विद्युत्जिह्व) का किरदार निभाते नजर आ रहे हैं. पौराणिक कथाओं और रामायण ग्रंथ के मुताबिक, विद्युत जीवा (विद्युत्जिह्व) रावण की बहन शूर्पणखा के पति थे l

कौन था विद्युत जीवा (विद्युत्जिह्व)?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, विद्युत्जिह्व को एक पराक्रमी योद्धा बताया गया है, जो कालकेय असुर वंश से थे. कुछ अन्य पौराणिक जानकारी के मुताबिक, विद्युतजीवा एक दानव योद्धा था, जो कालकेय नामक राजा की सेना का प्रमुख माना जाता है. वह राक्षस कुल से संबंध रखता था और रावण का विरोधी था l

कालकेय वंश अक्सर देवताओं और कभी-कभी अन्य असुर राजाओं से भी संघर्ष करता था. मान्यताओं के मुताबिक, शूर्पणखा ने विद्युत्जिह्व से गंधर्व प्रेम विवाह किया था. हालांकि, इस विवाह को उसके भाई रावण ने स्वीकार नहीं किया था. रामायण के अलग-अलग संस्करणों में इस संबंध के बारे में थोड़ी अलग जानकारी मिलती है l

See also  क्या बेटियां दे सकती हैं मुखाग्नि? जानिए गरुड़ पुराण और परंपराओं का रहस्य

कुछ किवदंतियों में ऐसा जिक्र मिलता है कि रावण को शूर्पणखा का विवाह पसंद नहीं था, क्योंकि विद्युत्जिह्व उसने धरती और स्वर्ग पर भी अपना अधिकार जमा लिया था. परिवार की प्रतिष्ठा, आपसी दुश्मनी और अलग-अलग पक्षों में होने के कारण रावण इस रिश्ते के खिलाफ था l

शूर्पणखा के पति विद्युत जीवा की कैसे हुई थी मृत्यु?
कथाओं के मुताबिक, रावण विद्युत जीवा से नफरत करता था. तो एक बार रावण विश्वविजय पर निकला, तो उसने पहले दक्षिण के कई राज्यों पर कब्जा किया था. फिर, उसने धरती और स्वर्ग पर भी अपना अधिकार जमा लिया था. इसके बाद वह पाताल लोक पहुंचा. वहां उसकी मुलाकात विद्युत जीवा से हुई. विद्युत जीवा ने रावण का साथ देने से मना कर दिया और युद्ध का फैसला लिया. दोनों के बीच जोरदार युद्ध हुआ, जिसमें विद्युज्जिह्व मारा गया था l

जब शूर्पणखा को अपने पति की मौत के बारे में पता चला, तो वह बहुत दुखी और गुस्से में आ गई थी. उसे अपने ही भाई रावण पर क्रोध आने लगा. इस घटना के बाद वह रावण को ही अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी और दुख का कारण मानने लगी. गुस्से में आकर उसने रावण को श्राप दिया कि जिस घमंड में उसने उसका सुहाग उजाड़ा है, उसी घमंड की वजह से उसका अंत भी होगा l

See also  बालों को हफ्ते में कितनी बार धोएं? ऑयली, ड्राई और नॉर्मल बालों के लिए एक्सपर्ट गाइड

शूर्पणखा ने लिया था अपने पति की मृत्यु का प्रतिशोध
शूर्पणखा के मन में रावण के खिलाफ क्रोध उसके पति की मौत के बाद ही बढ़ा था. विधवा होने का दुख उसके अंदर गहराई से बैठ गया था. इसी दर्द और नाराजगी के कारण उसने रावण को ऐसे कदम उठाने के लिए उकसाया, जिनका आगे चलकर बड़ा परिणाम हुआ. माना जाता है कि सीता हरण के पीछे कहीं न कहीं उसकी यही भावना काम कर रही थी l

दरअसल, कहा जाता है कि शूर्पणखा पंचवटी के जंगलों में घूमते हुए एक दिन श्री राम से मिली थी. उनके रूप और व्यक्तित्व को देखकर वह प्रभावित हो गई थी और उनसे अपने मन की बात कही. लेकिन श्री राम ने खुद को एक पत्नी के प्रति समर्पित बताते हुए उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया था. जब शूर्पणखा लक्ष्मण के पास गई, तो उन्होंने भी उसे स्वीकार करने से मना कर दिया था. इस बात से शूर्पणखा को बहुत गुस्सा आया. गुस्से में उसने माता सीता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तभी लक्ष्मण जी ने उसे दंड देते हुए उसकी नाक काट दी थी l

See also  अच्छी आदतों से रह सकते हैं फिट

क्या रावण का अंत विद्युत जीवा से जुड़ा था?
एक दूसरी मान्यता के अनुसार, शूर्पणखा के मन में पहले से ही अपने भाई रावण के प्रति नाराजगी थी, क्योंकि वह अपने पति विद्युत जीवा की मृत्यु के लिए उसे जिम्मेदार मानती थी. वह उससे बदला लेना चाहती थी, लेकिन उसकी ताकत के कारण सीधे मुकाबला नहीं कर सकती थी. जब उसे श्री राम की शक्ति और पराक्रम के बारे में पता चला, तो उसने सोचा कि श्री राम ही रावण को हरा सकते हैं. इसी वजह से उसने दोनों के बीच दुश्मनी बढ़ाने की कोशिश की थी. कहा जाता है कि आगे चलकर इसी घटनाक्रम ने सीता हरण की घटना को जन्म दिया और अंत में भगवान राम के हाथों रावण का अंत हुआ था l