अकलतरा में देखते ही देखते उजड़ा हंसता खेलता परिवार, एक के बाद एक तीन बच्चियों की संदिग्ध मौत, माँ ने बताई उस दर्दभरी रात की दास्ताँ

जांजगीर जिला के अकलतरा में मां-बाप के सामने ही एक के बाद एक तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया। किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिरकार बच्चों को हुआ क्या था। गमगीन माहौल में तीनों बच्चियों की रक्षाबंधन के दिन अंतिम संस्कार किया गया। घटना अकलतरा थाना क्षेत्र के ग्राम मुरलीडीह की है।

बच्चियों की मां अमरौतिन साँडे पति नरेंद्र सांडे उम्र 35 साल बताती है कि देखते ही देखते उनके बाहों में ही तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया। उनकी माने तो इस घटना ने उनका पूरा परिवार तबाह कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति इंदौर में एक प्राइवेट कंपनी में मशीन ऑपरेटर का काम करते हैं। वह अपने तीन बच्चों के साथ वही रहते हैं। इनके बड़ी बच्ची अंशी की उम्र 10 साल है जबकि विशुका 8 और विधि 5 साल की थी।

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मॉल से लाया पिज़ा, सभी ने खाया

23 अगस्त रविवार का दिन होने की वजह से सभी देर से उठे नाश्ते में सभी ने पोहा खाया। सब कुछ सामान्य चल रहा था दोपहर 2:00 बजे बच्चे कोचिंग के लिए चले गए। इसके बाद पति-पत्नी राशन सामान लेने के लिए पास के मॉल चले गए। वापसी में बच्चों के लिए पिज़्ज़ा लेकर आए। शाम के लगभग 4:30 बजे थे जब सभी बच्चे घर पहुंचे| इसके बाद सभी ने मिलकर पिज़्ज़ा को खाए। शाम 5:30 बजे के आसपास पड़ोस में रहने वाले मुंह बोले भाई के यहां दावत में गए थे| जहां दाल बाटी खाए थे। घर आने के बाद सभी सो गए | इसी बीच रात को लगभग 1:30 बजे के आसपास अचानक बड़ी बच्ची आशी के पेट में दर्द हुआ और वह उल्टी करने लगी देखते ही देखते दोनों बच्चियों भी पेट दर्द की शिकायत लेकर उल्टी करने लगे। कुछ देर बाद मामला शांत हुआ और सभी बच्चे आराम से सो गए। सोमवार की सुबह बच्चे तबीयत खराब होने की शिकायत करने लगे इसके बाद उसने घर ही में रहने की सलाह दी और स्कूल नहीं भेजा।

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आधी रात को आती थी आफत

दोपहर में स्कूल की टिफिन के लिए बनाए हुए आलू की भुर्जी और रोटी बच्चों ने खाई फिर शाम को कोचिंग चले गए। रात में खाने में चावल और घर में तैयार की गई रखिया बड़ी बनी हुई थी| जिसे सब ने खाया और सोने चले गए। फिर अचानक रात को 2:30 बजे के आसपास बच्चे उठ और पेट दर्द की शिकायत करते हुए उल्टी करने लगे| इसके बाद बच्चों के साथ-साथ माता-पिता के भी पेट दर्द शुरू हो गए और उल्टी करने लगे। उन्होंने किसी तरह रात बिताई और सुबह पास ही एक निजी अस्पताल पहुंचे| जहां उल्टी की दवाइयां और सभी को दो-दो इंजेक्शन लगाए गए। महिला ने खाने के लिए बाजार से सेव खरीदे |इसके बाद सभी घर पहुंचे। सभी ने सब खाए और फिर उल्टी की दवाई ली। सभी की हालत खराब थी रात में रोटी बनाई थी। जिसे सभी ने थोड़ा-थोड़ा खाया और फिर सो गए।

 

अलग-अलग हॉस्पिटल में, छोटी बच्ची की लाश के साथ पिता तो मझली के साथ माँ

एक बार फिर रात 1:30 बजे के आसपास छोटी बच्ची विधि रोते हुए उठाती है और पूरे शरीर में दर्द होने की शिकायत करती है। पिता नरेंद्र अपने पड़ोसी को उठना है और उसे बाइक से उपचार के लिए हॉस्पिटल लेकर जाता है। जहां डॉक्टर ने उसे मऊ उच्च चिकित्सा के लिए ले जाने की सलाह देता है इसके बाद वे मऊ निकल गए। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर ने परीक्षण उपरांत बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इधर मंझली बच्ची विशुका भी पेट दर्द की शिकायत करने लगी। तब महिला ने पड़ोसी की मदद से उसे ही अस्पताल ले जाने के लिए निकली रास्ते में उन्हें पुलिस वाले दिख गए जिसे गुहार लगाने के बाद पुलिस वहां में उसे पीथमपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण उपरांत उसे बच्ची को भी मृत घोषित कर दिया। दोनों मां-बाप पर दुखों का पहाड़ अलग-अलग जगह पड़ रहा था। एंबुलेंस की मदद से किसी तरह दोनों बच्चियों की लाश को घर लाया गया।

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आधे रास्ते में बड़ी ने भी तोड़ा दम

इधर दोनों बच्चियों की मौत की खबर सुनकर पैतृक गांव में भी मातम पसरा हुआ था। सभी वापस आने के लिए दबाव बनाएं। इस दौरान बड़ी बच्ची आशी की हालत अच्छी लग रही थी। इसके बाद नरेंद्र और अमरौतिन दोनों बच्चियों की लाश को लेकर पैतृक गांव लौटने का फैसला किया। पुलिस और डॉक्टर के सहयोग के बाद सभी एंबुलेंस से जांजगीर जिला के अकलतरा आ रहे थे। इसी बीच इटारसी पहुंचे थे कि बड़ी बच्ची आशी की तबीयत एक बार फिर बिगड़ने लगी। परिजनों ने एंबुलेंस चालक से कहकर स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उच्च चिकित्सा के लिए इटारसी रेफर कर दिया। बच्ची को तुरंत इटारसी के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां 1 घंटे तक बच्ची का इलाज चल और फिर उसने भी दम तोड़ दिया।

 

एक साथ हुआ अंतिम संस्कार

तीनों बच्चियों के मौत के बाद दोनों पति-पत्नी हताश निराश हो गए। वही अस्पताल में तीनों बच्चियों का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम होने के बाद सभी पैतृक ग्राम मुरलीडीह पहुंचे। रक्षाबंधन के दिन तीनों बच्चियों का गमगिनी माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। बच्चियों की मां अमरौतिन ने बताया कि बच्चे कभी बाहर का नहीं खाते थे उन्हें घर का ही अच्छा खाना देते थे उसके बाद भी कहां पर हमसे चूक हुई या समझ नहीं आ रहा है।

 

 

 

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पुलिस ने मामला किया दर्ज़

फिलहाल शुरुआती जांच में उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। इटारसी थाना प्रभारी सौरभ पांडे ने बताया कि चूंकि घटना की शुरुआत इंदौर के बेटमा थाना क्षेत्र से हुई है, इसलिए इटारसी पुलिस ने ‘शून्य पर मर्ग’ कायम कर प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। केस डायरी संबंधित बेटमा थाने भेजी जाएगी। तीनों बच्चियों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है इसके बाद खुलासा हो पाएगा की आखिर किस वजह से बच्चियों की मौत हुई है।

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सैम्पल लेने एफएसएल टीम पहुंची घर, होटल और हॉस्पिटल

इंदौर के समीप बेटमा क्षेत्र में तीन बहनों की मौत के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। तीनों बच्चियों की खाना खाने के बाद हालत बिगड़ी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो बच्चियों की मौत अस्पताल में हो गई थी। पिता इटारसी के मूल निवासी हैं। वे दोनों बच्चियों के शव और तीसरी बीमार बेटी को लेकर इटारसी के लिए निकले, लेकिन रास्ते में उसकी भी हालत खराब हो गई। इटारसी में इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

 

फूड पॉइजनिंग की आशंका के चलते बच्चियों ने जिस होटल में खाना खाया था, वहां से सैंपल लिए गए हैं। वहीं, पीथमपुर में इलाज के लिए माता-पिता जिस क्लिनिक में बच्चियों को लेकर गए थे, वहां से दी गई दवाएं भी जब्त की गई हैं।

 

अभी विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है। परिवार पीथमपुर के जिस मकान में रहता है, वहां भी एफएसएल टीम पहुंची और जांच की। उस मकान को भी सील कर दिया गया है। अफसरों ने आसपास के लोगों से भी परिवार के बारे में पूछताछ की है।

 

 

CG : खाना खाने के बाद तीन मासूम सगी बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग की आशंका