भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना से झाबुआ के प्रेम गामड़ बने आत्मनिर्भर

भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना से झाबुआ के प्रेम गामड़ बने आत्मनिर्भर

अपना व्यवसाय शुरू कर कमा रहे हर माह लगभग 1.50 लाख रुपये

जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है

भोपाल 
सफलता की कहानी

जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। व्यक्ति यदि अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखकर निरंतर प्रयास करता रहे, तो परिस्थितियां भी उसके मार्ग की बाधा नहीं बन पातीं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झाबुआ निवासी प्रेम गामड़ पिता मंजेश गामड़ की जिन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल स्थापित की है।

स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रेम गामड़ ने निजी क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। नौकरी के माध्यम से आजीविका तो चल रही थी, लेकिन उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और कुछ नया करने का सपना था। वे ऐसा कार्य करना चाहते थे जिससे उन्हें आत्मसंतुष्टि के साथ-साथ समाज के लोगों को बेहतर सेवाएं भी प्रदान करने का अवसर मिले। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के प्रति रुचि एवं तकनीकी समझ को देखते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया, लेकिन व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

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14.40 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय, अब हर माह हो रही लगभग 1.50 लाख रुपये की आय

प्रेम गामड़ ने जिला आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय में संपर्क कर"भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना" के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। निगम द्वारा उनका ऋण प्रकरण तैयार कर एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा, झाबुआ शाखा को भेजा गया।

बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण करने के बाद प्रेम गामड़ का 14.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण प्राप्त होने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस व्यवसाय प्रारंभ किया और पूरी मेहनत एवं लगन के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाया। आज उनका व्यवसाय क्षेत्र में अच्छी पहचान बना चुका है तथा वे प्रतिमाह लगभग 1.50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को रोजगार प्रदान किया है।

रोजगार की तलाश से रोजगारदाता बनने तक, प्रेम ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश

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प्रेम गामड़ बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब वे स्वयं रोजगार की तलाश में भटकते थे, लेकिन आज वे अपना सफल व्यवसाय संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम एवं भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाएं युवाओं के लिए सुनहरा अवसर हैं। यदि सही जानकारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का साथ हो तो कोई भी युवा स्वरोजगार के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना सकता है। आज प्रेम गामड़ की सफलता जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहे हैं।