स्टेट में चमकी विंध्य की काव्या, अब नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड पर नजर

शहडोल
खेल की बात हो और शहडोल का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता है. शहडोल जिले में क्रिकेट ही नहीं बल्कि और भी खेलों के गजब टैलेंट है. अभी हाल ही में शहडोल से काव्या सिंह वैश्य कराटे के खेल में नेशनल खेलने देहरादून गई हुई हैं, जिनसे गोल्ड मेडल की आस है. 4 जून से 7 जून तक उत्तराखंड के देहरादून में कराटे का नेशनल होना है। 

ये फेडरेशन नेशनल है, जिसे बहुत ही अहम चैंपियनशिप माना जा रहा है. इस नेशनल गेम्स में काव्या सिंह वैश्य से गोल्ड मेडल की उम्मीद जताई जा रही है. उनके कोच रामकिशोर चौरसिया का मानना है कि, काव्या की तैयारी पूरी है और जिस तरह से उसने स्टेट में गोल्ड मेडल जीता है, ठीक उसी तरह से नेशनल में भी इससे बेहतर की उम्मीद है। 

कौन हैं काव्या सिंह वैश्य?
काव्या सिंह वैश्य शहडोल जिले की उभरती हुई युवा कराटे खिलाड़ी हैं. जिनकी उम्र अभी लगभग 15 साल के करीब है. हाल ही में देहरादून में होने वाले नेशनल गेम्स में 14 से 15 कैडेट वर्ग में हिस्सा लेंगी. जिसमें 61 किलोग्राम वर्ग में खेलेंगी. ये नेशनल फेडरेशन उनके करियर के लिए अहम मानी जा रही है. काव्या सिंह वैश्य बताती हैं कि, ''वो पिछले 5 साल से कराटे सीख रही हैं. अब तक तीन स्टेट और दो नेशनल खेल चुकी हैं. जिसमें नेशनल में एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल है। 

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काव्या सिंह कहती हैं कि, ''वो कराटे में शुरुआत से ही अपना 100 परसेंट दे रही हैं. उनके जीवन का लक्ष्य बेस्ट कराटे प्लेयर बनना है और देश का नाम रोशन करना है.'' वो कहती है कि, ''उनकी प्रैक्टिस बहुत ही अच्छी चल रही है. किसी भी खिलाड़ी के करियर में सबसे बड़ा सपोर्ट उनकी फैमिली का होता है और उनकी फैमिली इस खेल के लिए उनका पूरा सपोर्ट कर रही है. इसीलिए वह चाहती है कि इस खेल में वह कुछ बेहतर करके दिखाएं, जिससे उनकी फैमिली और देश का नाम रोशन हो सके। 

कई सालों से कर रहीं कोचिंग
काव्या सिंह के कोच रामकिशोर चौरसिया बताते हैं कि, ''काव्या उनके पास चार-पांच साल पहले आई थी और जब से आई है तब से बड़े ही डिसिप्लिन तरीके से कोचिंग कर रही है. उसमें खास बात यह है कि वह मेहनत करती हैं और उससे भागती नहीं है. ज्यादातर बच्चों में देखने को आता है कि जब वह ट्रेनिंग करने आते हैं जब तक ध्यान न दो प्रैक्टिस नहीं करते. लेकिन काव्या के साथ ऐसा नहीं है. अगर उसे कोई टास्क दिया गया है तो उसे वो ईमानदारी से पूरा करती है और यही उसकी सफलता का राज है। 

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