सोशल मीडिया पर एक पुरानी लेकिन फिर से चर्चा में आई कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है. एक महिला ने अपने दिवंगत पति की अस्थियां कचरे की पेटी में फेंक दीं और उसका वीडियो बनाकर शेयर किया. उसने दावा किया कि सालों तक घरेलू हिंसा सहने के बाद ये उसका तरीका था अपने मन को हल्का करने का.
पति की मौत के बाद मातम मनाने के बजाय उसने इस कृत्य को अंतिम विदाई बताया. पोस्ट के मुताबिक पति कचरा गाड़ी चलाने का काम करते थे इसलिए राख को कचरे में डालना उनके पेशे से जोड़ा गया. ये मामला 2020 का है जब मार्शा वाइडनर नामकी महिला ने इसका वीडियो पोस्ट किया था. उन्होंने बताया कि पति के परिवार में कोई भी अस्थियां रखना नहीं चाहता था. उन्होंने सालों के कथित उत्पीड़न का जिक्र करते हुए कहा कि ये कृत्य उनके लिए क्लोजर यानी मन की शांति का माध्यम बना.
वायरल हो गया मामला
इसका वीडियो तेजी से वायरल हुआ और दो खेमों में बंटी प्रतिक्रियाएं सामने आई. कुछ लोगों ने महिला का समर्थन किया और कहा कि लंबे समय तक सहने के बाद ये उनका हक था. कुछ ने इसे अस्थियों के प्रति असम्मान बताया और कहा कि चाहे रिश्ता कैसा भी रहा हो, अंतिम अवशेषों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार होना चाहिए. शादी को पारंपरिक रूप से सात जन्मों का बंधन कहा जाता है. दो लोग एक-दूसरे का साथ निभाने की प्रतिज्ञा करते हैं. लेकिन जब रिश्ते में हिंसा प्रवेश कर जाती है तो ये बंधन कई महिलाओं के लिए बोझ बन जाता है. भारत सहित दुनिया भर में घरेलू हिंसा के मामले सामने आते रहते हैं. कुछ महिलाएं कानूनी रास्ता अपनाती हैं तो कुछ चुपचाप सहती रहती हैं. इस कहानी में महिला ने पति की मौत के बाद अपने तरीके से प्रतिक्रिया दी. उन्होंने जश्न मनाने की बात नहीं कही बल्कि राख का निपटान अपने अनुभव से जोड़ा.
बढ़ रहे घरेलू हिंसा के मामले
घरेलू हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है. इसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या आर्थिक उत्पीड़न शामिल हो सकता है. कई महिलाएं सालों तक इसे सहन करती हैं क्योंकि सामाजिक दबाव, आर्थिक निर्भरता या बच्चों की चिंता उन्हें रोकती है. जागरूकता बढ़ने के साथ ज्यादा महिलाएं अब आवाज उठा रही हैं. हेल्पलाइन, कानूनी सहायता और सहायता समूह उपलब्ध हैं. इस मामले में महिला ने अपने अनुभव को सार्वजनिक किया और उसके बाद का कदम उठाया जो चर्चा का विषय बना. वीडियो में महिला राख का डिब्बा लेकर कचरे की पेटी के पास जाती दिखती हैं और उसे अंदर डाल देती हैं. उन्होंने कैमरे के सामने अपना पक्ष रखा. पति के पेशे का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे एक तरह का अंतिम संस्कार बताया. समर्थन करने वालों ने कहा कि सालों की तकलीफ के बाद ये उनका व्यक्तिगत फैसला था. आलोचकों ने कहा कि मानव अवशेषों के साथ ऐसा व्यवहार सांस्कृतिक और नैतिक मान्यताओं के खिलाफ है. दोनों पक्षों की बातें सोशल मीडिया पर लंबे समय तक चलीं. ऐसे मामले याद दिलाते हैं कि रिश्तों में सम्मान और सुरक्षा कितनी जरूरी है.