AI टूल से छेड़ेगा साइबर वॉर, RBI का MuleHunter करेगा फर्जी बैंक खातों को बंद

 नई दिल्ली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है।

डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं।

इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं।

म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है
म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है।

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अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है।

म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज 
साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है। 

कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम 
बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है।

MuleHunter.AI क्या है
    इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है. 
    यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है. 
    अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है. 

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कैसे काम करता है ये सिस्टम 
    यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है. 
    यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है. 
    यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है. 
    खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है. 

I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की 
इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं।

सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले
हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं।

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होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन 
होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।