हमारे शरीर में जब विटामिन, मिनरल्स या अन्य पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, तब कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं. कुछ बीमारियां भी लोगों के शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं और इनका पता काफी देर से चलता है. कई लोगों को कभी-कभी हाथों, पैरों, उंगलियों या तलवों में झुनझुनी महसूस होती है. आमतौर पर लंबे समय तक एक ही पोश्चर में बैठने या सोने की वजह से ऐसा हो सकता है. कुछ देर बाद यह समस्या अपने आप ठीक भी हो जाती है. अगर झुनझुनी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह सेहत से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है. इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. वक्त रहते जांच कराने से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.
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नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News को बताया हाथ-पैरों में झुनझुनी आमतौर पर नसों पर दबाव पड़ने या नसों के ठीक से काम न करने की वजह से होती है. जब शरीर के किसी हिस्से तक नसों के जरिए सिग्नल पहुंचने में बाधा आती है, तो व्यक्ति को चुभन, झनझनाहट या सुन्नपन जैसा महसूस हो सकता है. कभी-कभार ऐसा होना नॉर्मल है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे कोई मेडिकल कारण भी हो सकता है. इसके पीछे विटामिन बी12 की कमी और डायबिटीज जैसे कारण भी छिपे हो सकते हैं.
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विटामिन B12 की हो सकती है कमी
डॉक्टर के मुताबिक विटामिन B12 नसों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है. इसकी कमी होने पर हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी, थकान और संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है. वेजिटेरियन लोगों और बुजुर्गों में विटामिन B12 की कमी बहुत कॉमन है. ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर जांच कराना फायदेमंद हो सकता है. कई बार गर्दन, पीठ या कलाई की नस दब जाने के कारण भी झुनझुनी महसूस हो सकती है. लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठना, लगातार कंप्यूटर पर काम करना या रीढ़ से जुड़ी कुछ समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं. अगर झुनझुनी के साथ दर्द भी है, तो यह नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है.
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डायबिटिक न्यूरोपैथी का भी संकेत
एक्सपर्ट की मानें तो लंबे समय तक अनकंट्रोल ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. इस कंडीशन को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है. इसमें पैरों और हाथों में झुनझुनी, जलन, दर्द या सुन्नपन महसूस हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों को इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, ताकि समय रहते स्थिति को कंट्रोल किया जा सके. कुछ मामलों में थायरॉयड डिसऑर्डर, किडनी की बीमारी, ऑटोइम्यून डिजीज या ब्लड फ्लो में कमी भी झुनझुनी का कारण बन सकती है. इसलिए बार-बार होने वाली इस समस्या को सिर्फ सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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इस परेशानी का इलाज क्या है?
डॉक्टर सोनिया रावत का साफ कहना है कि झुनझुनी का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है. अगर समस्या विटामिन की कमी से जुड़ी है, तो डॉक्टर सप्लीमेंट्स और खानपान में बदलाव की सलाह दे सकते हैं. डायबिटीज से संबंधित मामलों में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी होता है. अगर नस दबने की वजह से झुनझुनी हो रही है, तो फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज या अन्य ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है. हाथ-पैरों में झुनझुनी से बचाव के लिए संतुलित डाइट लेना जरूरी है. विटामिन B12, फोलेट और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर खाना नसों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.