सीजेपी की चेतावनी के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बैकफूट पर, तत्काल वापस लिया निर्णय, NALSAR के छात्रों को वकालत के लिए किया था निबंधित

बिहार के रहने वाले राज्यसभा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)के अभिजीत दीपके और सौरभ दास ने तंज कसा है। हुआ यूं कि बीसीआई यानी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के एक आदेश के बाद बवाल मच गया। हालांकि, बाद में वो आदेश वापस ले लिया गया, लेकिन तब तक बात काफी आगे बढ़ चुकी थी। हुआ यूं कि पहले निर्देश ये निकला की सीजेआई सूर्यकांत का विरोध करने वाले 2026 बैच के स्टूडेंट्स को देशभर में वकालत के लिए निबंधित नहीं किया जाए। उसके बाद इस पर विवाद हो गया।

 

विवादों में फंसे मनन कुमार मिश्रा

कॉकरोच जनता पार्टी ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा आदेश निकालने की हिम्मत कैसे हो गई। विवाद बढ़ते देख बार काउंसिल ने आदेश तो वापस ले लिया। उल्टे सफाई भी दी कि अब छात्रों को एनरोल करने से नहीं रोका जाएगा। उधर, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तो इशारों में मनन कुमार मिश्रा से इस्तीफे की मांग कर दी। मामला अब बहुत आगे निकल चुका है।

 

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कौन हैं मनन कुमार मिश्रा?

मनन कुमार मिश्रा बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले हैं। वे एक वरिष्ठ वकील हैं। वर्तमान में वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं।उन्होंने पटना विधि महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय से 1977-1980 में स्नातक व्यावसायिक एलएलबी, बिहार विश्वविद्यालय राजेंद्र महाविद्यालय छपरा से 1973-1976 में बीएससी (ऑनर्स)।पढ़ाई के गोपालगंज सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। उनके पास कुल 14 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। उनके ऊपर देनदारी के रूप में 25 लाख रुपये हैं। इससे अधिक भी हो सकता है।उन्होंने 1982 में पटना हाई कोर्ट में वकालत शुरू की उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर काम करने लगे। वे लंबे समय तक बीसीआई के अध्यक्ष रहे हैं। 2025 में लगातार सातवीं बार चुने गए हैं।मनन कुमार मिश्रा सियासत में हमेशा सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2010 में कांग्रेस की टिकट पर बैकुंठपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और उसके बाद बीजेपी से जुड़ गए।2024 में बीजेपी ने उन्हें बिहार से राज्यसभा का कैंडिडेट बनाया और उसके बाद वे निर्विरोध चुने गए। उनकी पहचान एक वरिष्ठ अधिवक्ता और राजनीतिक व्यक्ति के रूप में होती है।

मनन कुमार मिश्रा के आदेश पर बवाल?

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से निकले इस फरमान के तुरंत बाद अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि क्या होगा यदि सभी कानूनी कॉकरोच एक साथ आ जाएं। एक अन्य पोस्ट में मनन मिश्रा पर तंज कसते हुए दीपके ने कहा कि वे राज्यसभा सीट का कर्ज अदा कर रहे हैं। दीपके ने अपने तीसरे पोस्ट में कहा कि मनन मिश्रा का समय आ गया है।

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उधर, सौरभ दास, सीजेपी प्रवक्ता ने अपने पोस्ट में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया NALSAR के 2026 में स्नातक हो रहे छात्र का एडवोकेट के तौर पर निबंधन रोकने का फैसला, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने चीफ जस्टिस को बुलाने का विरोध किया था। ये फैसला सही नहीं है।

 

सीजेपी ने जारी की चेतावनी

सौरभ दास ने आगे लिखा कि छात्रों को असहमति जताने के लिए सजा नहीं दी जा सकती। मनन भाई ने छात्रों को राष्ट्र-विरोधी ताकतें कहा। बीसीआई के अध्यक्ष के रूप में 2012 से अब तक भाई ने क्या कल्याणकारी कार्य किए हैं? मनन कुमार मिश्रा की बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सिर्फ एक साल में बैठकों और सम्मेलनों पर 14 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।

 

आज उन्हें NALSAR के छात्रों पर अपने एक अनुचित आदेश का एक हिस्सा एक घंटे के भीतर वापस लेना पड़ा। तो ये 14 करोड़ रुपये कहां और कैसे खर्च हो रहे हैं? 12 करोड़ रुपये यात्रा और आवास पर भी खर्च हुए। लेकिन नतीजा क्या निकला? अगर श्री मिश्रा युवा छात्रों के खिलाफ ऐसा कठोर आदेश जारी कर सकते हैं, तो उन्होंने युवा वकीलों और लॉ स्कूलों के कल्याण के लिए क्या किया है? वे 2012 से इस पद पर हैं और 2030 तक रहेंगे। अब समय आ गया है।

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